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Jhunjhunun

⛔चला जाता हूँ हँस्ता खेलता मौज-ए-हवादिश से
अगर आंसानिया हो तो जिंदगी दुश्वार हो जाए!!⛔
#brothers
#kayamkhani
#rj18wale

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अगर आंसानिया हो तो जिंदगी दुश्वार हो जाए!!⛔
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174 13 19 October, 2019
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Nahru Park

कायम है दुनिया के बावजूद इतने फसादों के
.
शुक्र है ऐ इंसान तेरी कोई कौम नहीं👑☺ @mr.sikander_khan
.
#unche_kad_wale✌😎 #tshirt #tshirtlovers #alwaysyou #ajmer #taragarhfort #parkour #park #nightout #dost #Kayamkhani #miyabhai #Sardarshahar #khansaab #jindjaan #best #looking #like #followforfollowback #churu #rajsthan #khansaab #miyabhai

कायम है दुनिया के बावजूद इतने फसादों के
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शुक्र है ऐ इंसान तेरी कोई कौम नहीं👑☺ @mr.sikander_khan
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83 25 18 October, 2019
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Army Area Niwaru Road Jhotwada

If you think lifting weights is dangerous, try being weak. Being weak is more dangerous. 🦁
#kayamkhani 💞

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#kayamkhani 💞
114 14 17 October, 2019
#kayamkhani 😎😎
43 7 17 October, 2019
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जोधपुर राजस्थान

❤ जहर तो कोई भी पी लेगा बाऊजी 🖤
❤ बात आड़े आये हालताँ नै पिण की है 🖤
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. #jassmanak #jodhpur  #jodhpuri  #rj19  #rajasthan #love  #age19  #prada  #instagram  #edit  #shooting  #shootout #model #auto  #style  #top #kayamkhani #edit #new #picoftheday #punjab #splendor #style #auto #market #bollywood #pollywood #hollywood #pappyagaikwad #faisu #keepgoing #keepsupporting✌🎀

❤ जहर तो कोई भी पी लेगा बाऊजी 🖤
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119 26 16 October, 2019
Royal #Kayamkhani#
16 0 16 October, 2019
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Kuchaman City, India

Soft Attitude always creates Strong Relations
So Keep Softness in Your Attitude And Make Long And Strong Relation😎😎 #kayamkhani

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105 32 15 October, 2019
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Jodhpur

हाथ का #मजहब नही देखते परिंदे, 💘
जो भी दाना देदे #खुशी से खा लेते हैं! ❤🐦 @irehan_kayamkhani .
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#birds #lover #kayamkhani #punjabi #chandigarh #dhillonpreet #faisu #kabootar #pigeon

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जो भी दाना देदे #खुशी से खा लेते हैं! ❤🐦 @irehan_kayamkhani .
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127 34 10 October, 2019
Royal #Kayamkhani#
53 10 8 October, 2019
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@kayamkhaniashafaque

... हालांकि मूलतः राजस्थान मे राजपूत समाज के मोटेराव चोहान के पूत्रों द्वारा इस्लाम धर्म अपनाने के बाद उनके वंशजो को "कायमखानी" बीरादरी के तौर पर जाना जाता। जो कायमखानी बीरादरी आज के समय राजस्थान के जयपुर, बीकानेर, जोधपुर व अजमेर सम्भाग मे बडी तादाद मे एवं मेवाड़ के भीलवाड़ा सहित प्रदेश के कुछ क्षेत्रो के अतिरिक्त यहां से रोजगार या फिर नवाब की चाहत पर दिसवर मे प्रमुख रुप से निवास करते है। क्षत्रिय वंशज होने के कारण अक्खड़ स्वभाव व लगन एवं वादे के पक्के होने के साथ साथ अन्य मुस्लिम बीरादरियो से अलग हटकर देहाती परिवेस मे सभी से मिलजुल कर रहने के आदी व फौज-पुलिस जैसी सरकारी नोकरी की चाहत रखकर तालीम को हासिल करने की दिवानगी इनमे भरपूर पाने के बावजूद अभी तक कायमखानी अन्य मुस्लिम बीरादरियो के साथ सामंजस्य बैठाकर सही मायने मे बडे भाई की भूमिका निभाने मे उतनी सफल नही हो पाई है, जितनी इनको भूमिका निभानी चाहिये थी। राजस्थान मे मुस्लिम समुदाय की अन्य बीरादरियो के मुकाबले तालीम को अधिक मजबूती से पकड़ कर सरकारी सेवा मे बाबू से लेकर अधिकारी स्तर की नौकरी मे ठीक ठाक प्रतिनिधित्व पाने वाली कायमखानी बीरादरी ने अपनी बस्तियों मे रहने वाली अन्य मुस्लिम बीरादरियो मे शिक्षा व सरकारी नोकरी पाने की ललक पैदा करने के लिये वो कोशिशे नही की, जिस कोशिश की दरकार रही है। रहन सहन , स्वभाव-बोलचाल की भाषा व सामाजिक वेषभूषा के अलावा पारम्परिक रिवायतो के हिसाब से चाहे कायमखानी अन्य मुस्लिम बीरादरियो से अलग नजर आती हो लेकिन सभी के मुस्लिम होने के लिये उनका अवल धर्म बनता है कि वो बडे भाई की भूमिका निभाते हुये अन्य बीरादरियो को भी शेक्षणिक फिल्ड की जानकारी देते हुये उन्हें भी प्रगति के पथ पर साथ लैकर दोड़ लगा कर अच्छे से वतन की तरक्की मे भागीदारी निभाये। राजस्थान प्रदेश मे अब तक जस्टिस सैय्यद फारुक हसन नकवी, जस्टिस असगर अली चोधरी, जस्टिस यामीन अली, जस्टिस भवंरु खा व जस्टिस मोहम्मद रफीक हाईकोर्ट जज बने है। जिनमे जस्टिस असगर अली चोधरी व जस्टिस यामीन अली का तालूक मूलतः यूपी से है। राजस्थान के बने केवल जस्टिस सैयद फारुक हसन, जस्टिस भवंरु खा व जस्टिस मोहम्मद रफीक मे से जस्टिस फारूक हसन को छोड़कर दोनो जस्टिस कायमखानी बीरादरी से तालूक रखते है। इसी तरह राजस्थान केडर मे भारतीय प्रशासनिक सेवा के बनने वाले अधिकारियों मे जे एम खान, सलाऊद्दीन अहमद, , ऐ.आर खान, एम एस खान, अशफाक हुसैन, मोहम्मद हनीफ , यूडी खान व जाकीर हुसैन के अलावा कमरुल जमा चोधरी एवं अतर आमिर का नाम शामिल है।

... हालांकि मूलतः राजस्थान मे राजपूत समाज के मोटेराव चोहान के पूत्रों द्वारा इस्लाम धर्म अपनाने के बाद उनके वंशजो को "कायमखानी" बीरादरी के तौर पर जाना जाता। जो कायमखानी बीरादरी आज के समय राजस्थान के जयपुर, बीकानेर, जोधपुर व अजमेर सम्भाग मे बडी तादाद मे एवं मेवाड़ के भीलवाड़ा सहित प्रदेश के कुछ क्षेत्रो के अतिरिक्त यहां से रोजगार या फिर नवाब की चाहत पर दिसवर मे प्रमुख रुप से निवास करते है। क्षत्रिय वंशज होने के कारण अक्खड़ स्वभाव व लगन एवं वादे के पक्के होने के साथ साथ अन्य मुस्लिम बीरादरियो से अलग हटकर देहाती परिवेस मे सभी से मिलजुल कर रहने के आदी व फौज-पुलिस जैसी सरकारी नोकरी की चाहत रखकर तालीम को हासिल करने की दिवानगी इनमे भरपूर पाने के बावजूद अभी तक कायमखानी अन्य मुस्लिम बीरादरियो के साथ सामंजस्य बैठाकर सही मायने मे बडे भाई की भूमिका निभाने मे उतनी सफल नही हो पाई है, जितनी इनको भूमिका निभानी चाहिये थी। राजस्थान मे मुस्लिम समुदाय की अन्य बीरादरियो के मुकाबले तालीम को अधिक मजबूती से पकड़ कर सरकारी सेवा मे बाबू से लेकर अधिकारी स्तर की नौकरी मे ठीक ठाक प्रतिनिधित्व पाने वाली कायमखानी बीरादरी ने अपनी बस्तियों मे रहने वाली अन्य मुस्लिम बीरादरियो मे शिक्षा व सरकारी नोकरी पाने की ललक पैदा करने के लिये वो कोशिशे नही की, जिस कोशिश की दरकार रही है। रहन सहन , स्वभाव-बोलचाल की भाषा व सामाजिक वेषभूषा के अलावा पारम्परिक रिवायतो के हिसाब से चाहे कायमखानी अन्य मुस्लिम बीरादरियो से अलग नजर आती हो लेकिन सभी के मुस्लिम होने के लिये उनका अवल धर्म बनता है कि वो बडे भाई की भूमिका निभाते हुये अन्य बीरादरियो को भी शेक्षणिक फिल्ड की जानकारी देते हुये उन्हें भी प्रगति के पथ पर साथ लैकर दोड़ लगा कर अच्छे से वतन की तरक्की मे भागीदारी निभाये। राजस्थान प्रदेश मे अब तक जस्टिस सैय्यद फारुक हसन नकवी, जस्टिस असगर अली चोधरी, जस्टिस यामीन अली, जस्टिस भवंरु खा व जस्टिस मोहम्मद रफीक हाईकोर्ट जज बने है। जिनमे जस्टिस असगर अली चोधरी व जस्टिस यामीन अली का तालूक मूलतः यूपी से है। राजस्थान के बने केवल जस्टिस सैयद फारुक हसन, जस्टिस भवंरु खा व जस्टिस मोहम्मद रफीक मे से जस्टिस फारूक हसन को छोड़कर दोनो जस्टिस कायमखानी बीरादरी से तालूक रखते है। इसी तरह राजस्थान केडर मे भारतीय प्रशासनिक सेवा के बनने वाले अधिकारियों मे जे एम खान, सलाऊद्दीन अहमद, , ऐ.आर खान, एम एस खान, अशफाक हुसैन, मोहम्मद हनीफ , यूडी खान व जाकीर हुसैन के अलावा कमरुल जमा चोधरी एवं अतर आमिर का नाम शामिल है।
11 2 6 October, 2019
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।अशफाक कायमखानी।
जयपुर। राजस्थान के बडे भु-भाग पर देहाती परिवेष मे रहने की आदि एवं क्रषि व सरकारी सेवा मे रहकर बच्चों की पढाई के लिये संघर्ष करने के लिये आतूर नजर आने वाली कायमखानी बीरादरी के कांग्रेस की सियासत मे अब जाकर अस्तित्व पर खतरा मंडराता साफ नजर आने लगा है। जिस हालात का पूर्वाभास होने पर बीरादरी मे अंदर ही अंदर करंट दोड़ रहा कि कांग्रेस की थाली मे सजा भोजन खाया जाय ओर खाने मे ना मिले तो उस थाली को उडेला कैसे जाये।मुस्लिम समुदाय मे शैक्षणिक व सरकारी सेवा के तौर पर कुछ ठीक ठाक माने जाने वाली कायमखानी बीरादरी अजमेर, जोधपुर, जयपुर व उदयपुर सम्भाग मे खासतौर पर निवास करती है। कांग्रेस के अलावा कायमखानी बीरादरी के आलम अली खा फतेहपुर से स्वतंत्रत पार्टी व जनता पार्टी के नीसान पर रमजान खा पुष्कर से भाजपा के नीसान पर विधायक रहे है। एवं यूनूस खा दूसरी दफा डीडवाना से भाजपा के नीसान पर विधायक है। इसके विपरीत फतेहपुर से गफ्फार खा, चुरु से भालूखा व पिछले चुनाव तक तीन दफा भंवरु खा फतेहपुर से कांग्रेस के नीसान पर विधायक बनते रहे है। अब तक अधीकांश समय कांग्रेस कायमखानी को एक या दो टिकट पहले चूरु व फिर फतेहपुर से टिकट देती आई है। 2013- मे कांग्रेस से दो कायमखानी फतेहपुर से भंवरु खा व लाडनू से लियाकत अली खा को टिकट मिला था। लेकिन 2018 के चुनाव मे टिकट मिलने को लेकर कायमखानी बीरादरी के आसार पूरी तरह बदले बदले नजर आ रहे है।हालांकि फतेहपुर से मरहुम भंवरु खा के बाद होने वाले पहले 2018 के विधानसभा चुनाव मे उनके छोटे भाई हाकम अली खां कांग्रेस की टिकट पाने के प्रमुख दावेदार माने जा रहे है। लेकिन उनकी राह मे कांग्रेस जन ही अनेक तरह के कांटे बीछाने मे कार्यरत है। जबकि दूसरी सीट चूरु से कायमखानी दावेदारी आज के समय काफी कमजोर मानी जा रही है। डीडवाना से हबीब खा टिकट पाने की कोशिश मे है। लाडनू से अब लियाकत खा को टिकट मिलने के आसार हवा हो चुके है। कुल मिलाकर यह है कि कांग्रेस सूत्रोनुसार पता चल रहा है कि 2018-के चुनाव मे कांग्रेस किसी भी कायमखानी को टिकट ना देकर उनके अस्तित्व को नकारने को तत्पर लग रही है। जबकि इस अंदेशा का पूर्वाभास करके कायमखानी बीरादरी के समाजी व सियासी लीडरान आगे की रणनीति बनाने मे जल्द जयपुर मे बैठने वाले बताते है। देखते है कि राजस्थान का सियासी तौर पर बेदार कायमखानी मतदाता अपने अस्तित्व को बचाये रखने के लिये कांग्रेस का बना बनाया रायता बीगाड़ता है या फिर अपना सियासी अस्तित्व मिटने देने को भेड़ की तरह जलती पीढ से बेपरवाह होने की तरह चुपचाप देखता रहता है॥

।अशफाक कायमखानी।
जयपुर।  राजस्थान के बडे भु-भाग पर देहाती परिवेष मे रहने की आदि एवं क्रषि व सरकारी सेवा मे रहकर बच्चों की पढाई के लिये संघर्ष करने के लिये आतूर नजर आने वाली कायमखानी बीरादरी के कांग्रेस की सियासत मे अब जाकर अस्तित्व पर खतरा मंडराता साफ नजर आने लगा है। जिस हालात का पूर्वाभास होने पर बीरादरी मे अंदर ही अंदर करंट दोड़ रहा कि कांग्रेस की थाली मे सजा भोजन खाया जाय ओर खाने मे ना मिले तो उस थाली को उडेला कैसे जाये।मुस्लिम समुदाय मे शैक्षणिक व सरकारी सेवा के तौर पर कुछ ठीक ठाक माने जाने वाली कायमखानी बीरादरी अजमेर, जोधपुर, जयपुर व उदयपुर सम्भाग मे खासतौर पर निवास करती है। कांग्रेस के अलावा कायमखानी बीरादरी के आलम अली खा फतेहपुर से स्वतंत्रत पार्टी व जनता पार्टी के नीसान पर रमजान खा पुष्कर से भाजपा के नीसान पर विधायक रहे है। एवं यूनूस खा दूसरी दफा डीडवाना से भाजपा के नीसान पर विधायक है। इसके विपरीत फतेहपुर से गफ्फार खा, चुरु से भालूखा व पिछले चुनाव तक तीन दफा भंवरु खा फतेहपुर से कांग्रेस के नीसान पर विधायक बनते रहे है। अब तक अधीकांश समय कांग्रेस कायमखानी को एक या दो टिकट पहले चूरु व फिर फतेहपुर से टिकट देती आई है। 2013- मे कांग्रेस से दो कायमखानी फतेहपुर से भंवरु खा व लाडनू से लियाकत अली खा को टिकट मिला था। लेकिन 2018 के चुनाव मे टिकट मिलने को लेकर कायमखानी बीरादरी के आसार पूरी तरह बदले बदले नजर आ रहे है।हालांकि फतेहपुर से मरहुम भंवरु खा के बाद होने वाले पहले 2018 के विधानसभा चुनाव मे उनके छोटे भाई हाकम अली खां कांग्रेस की टिकट पाने के प्रमुख दावेदार माने जा रहे है। लेकिन उनकी राह मे कांग्रेस जन ही अनेक तरह के कांटे बीछाने मे कार्यरत है। जबकि दूसरी सीट चूरु से कायमखानी दावेदारी आज के समय काफी कमजोर मानी जा रही है। डीडवाना से हबीब खा टिकट पाने की कोशिश मे है। लाडनू से अब लियाकत खा को टिकट मिलने के आसार हवा हो चुके है। कुल मिलाकर यह है कि कांग्रेस सूत्रोनुसार पता चल रहा है कि 2018-के चुनाव मे कांग्रेस किसी भी कायमखानी को टिकट ना देकर उनके अस्तित्व को नकारने को तत्पर लग रही है। जबकि इस अंदेशा का पूर्वाभास करके कायमखानी बीरादरी के समाजी व सियासी लीडरान आगे की रणनीति बनाने मे जल्द जयपुर मे बैठने वाले बताते है। देखते है कि राजस्थान का सियासी तौर पर बेदार कायमखानी मतदाता अपने अस्तित्व को बचाये रखने के लिये कांग्रेस का बना बनाया रायता बीगाड़ता है या फिर अपना सियासी अस्तित्व मिटने देने को भेड़ की तरह जलती पीढ से बेपरवाह होने की तरह चुपचाप देखता रहता है॥
8 5 6 October, 2019
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'Chal Chal Nikal, Bhaag yaha se Bhaag yaha se.'🔥
#sherayasher
#Pathan
#khan
#kayamkhani 🔥

'Chal Chal Nikal, Bhaag yaha se Bhaag yaha se.'🔥
#sherayasher ✌
#Pathan 
#khan
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161 15 6 October, 2019
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Jodhpur

ठंड राख छोटु नी तो ❤
ठंडा भी करना जाणा हाँ 🔥

@nasir_dady
@irehan_kayamkhani .
.
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#chai  #lover  #desi  #jodhpuri  #jassmanak  #jodhpur #rajasthan  #haryanavi  #haryana  #style  #top  #auto #evening  #morning  #kayamkhani  #nose  #eye  #love  #1  #cool #instagram  #hashtag  #rajasthan  #iphonex  #rajput #jaat  #bishnoi #jodhpur #rajasthan

ठंड राख छोटु नी तो ❤
 ठंडा भी करना जाणा  हाँ 🔥

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137 17 5 October, 2019
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भारतीय मुस्लिम समुदाय के पैंसठ साल भाजपा या संघ को रोकने मे निकल गये। मुस्लिम विकास सच्चर कमेटी की रिपोर्ट मे बताया गया है। ।अशफाक कायमखानी।
जयपुर। भारतीय मुस्लिम समुदाय को कांग्रेस पार्टी के वफादार दलालो व कुछ धार्मिक तंजीमो की तरफ एक साझा साझिस के तहत 65-70 साल से यह समझाये जाता रहा है कि वो शैक्षणिक विकास व महासी तरक्की की सोच दिल मे पालने के बजाय पहले जनसंघ व 1980 के बाद भाजपा को रोकने के लिये पूरी ताकत लगाते रहे वरना भाजपा के आने पर उनके वजूद का खतरा पैदा हो सकता है। इसी तरह पहले जनसंघ व अब भाजपा को जब चुनावी मैदान मे मुस्लिम समुदाय का समर्थन नही मिलता नजर आया तो उन्होंने भी मुस्लिम मुखालफत का झंडा लेकर बहुसंख्यक तबको को एकजुट करने मे पूरी ताकत लगा दी। पर दोनो ही हालात मे मुस्लिम समुदाय को मिला केवल पिछड़ापन व आस्तीन के सांपो का सहरा व सपेरो से दूश्मनी। मात्र पाक परवरदिगार से डरने वाले मुस्लिम समुदाय को सत्ता मे हिस्सेदारी देने के बजाय एवं जस्टिस राजेन्द्र सच्चर समिति को गठित करके रिपोर्ट बनाने वाली कांग्रेस सरकार के समय तो जो कुछ हुवा उसको सब जानते है लेकिन 2019 के आम लोकसभा चुनाव मे भी मुस्लिम धार्मिक तंजीमो का एक नया झूंड मिलकर मुस्लिम समुदाय मे डर व भय का वातावरण बनाकर केवल इसलिए पूरा का पूरा वोट कांग्रेस के खाते मे डलवाने मे लगा हुवा है कि वरना भाजपा आने पर बूरे परीणाम भूगतने पड़ सकते है। हालांकि भाजपा व भाजपा सरकार के अनेक मंत्रियों के बोल मुस्लिम समुदाय के तालूक से अनेक दफा जहरीले आते रहे है। लेकिन जब यही नेता भाजपा से पहले कांग्रेस मे थे तब ओर जब भाजपा छोड़कर कांग्रेस मे शामिल हो जाते है तब शहद की तरह मिठ्ठे बोल बोलने वाले सेकयूलर लीडर की पदवी क्यो पाने लगते है। यानि जब हमारे साथ हो तो पाक दामन और विरोधी दल मे गये तो दामन पर दाग। यह कैसा बर्ताव ? कांग्रेस व भाजपा की एक तरह से तब एकता साफ साफ नजर आती है। जब जब बनने वाले तीसरे मोर्चे को कमजोर या खत्म करने का अवसर मिलता है। हालांकि तीसरे मोर्चे की बनी सरकारों ने भी मुस्लिम समुदाय के लिये कोई खास सकारात्मक काम नही किये। लेकिन कांग्रेस व भाजपा सरकारों के मुकाबले ठीक सरकारे साबित हुई है।कांग्रेस पार्टी ने मुस्लिम समुदाय मे अपने खास चमचो को पालने व उनको जहनी तौर पर कमजोर करके उनके जेहन मे केवल भाजपा को अबके दफा रोकने का जीमा होने की दी गई घूंटी का गुणगान करवाती रहती है। दो सीट से पूर्ण बहुमत की भाजपा सरकार बनने की असल जिम्मेदार कांग्रेस की नीतियां रही है।

भारतीय मुस्लिम समुदाय के पैंसठ साल भाजपा या संघ को रोकने मे निकल गये। मुस्लिम विकास सच्चर कमेटी की रिपोर्ट मे बताया गया है। ।अशफाक कायमखानी।
जयपुर।  भारतीय मुस्लिम समुदाय को कांग्रेस पार्टी के वफादार दलालो व कुछ धार्मिक तंजीमो की तरफ एक साझा साझिस के तहत 65-70 साल से यह समझाये जाता रहा है कि वो शैक्षणिक विकास व महासी तरक्की की सोच दिल मे पालने के बजाय पहले जनसंघ व 1980 के बाद भाजपा को रोकने के लिये पूरी ताकत लगाते रहे वरना भाजपा के आने पर उनके वजूद का खतरा पैदा हो सकता है। इसी तरह पहले जनसंघ व अब भाजपा को जब चुनावी मैदान मे मुस्लिम समुदाय का समर्थन नही मिलता नजर आया तो उन्होंने भी मुस्लिम मुखालफत का झंडा लेकर बहुसंख्यक तबको को एकजुट करने मे पूरी ताकत लगा दी। पर दोनो ही हालात मे मुस्लिम समुदाय को मिला केवल पिछड़ापन व आस्तीन के सांपो का सहरा व सपेरो से दूश्मनी। मात्र पाक परवरदिगार से डरने वाले मुस्लिम समुदाय को सत्ता मे हिस्सेदारी देने के बजाय एवं जस्टिस राजेन्द्र सच्चर समिति को गठित करके रिपोर्ट बनाने वाली कांग्रेस सरकार के समय तो जो कुछ हुवा उसको सब जानते है लेकिन 2019 के आम लोकसभा चुनाव मे भी मुस्लिम धार्मिक तंजीमो का एक नया झूंड मिलकर मुस्लिम समुदाय मे डर व भय का वातावरण बनाकर केवल इसलिए पूरा का पूरा वोट कांग्रेस के खाते मे डलवाने मे लगा हुवा है कि वरना भाजपा आने पर बूरे परीणाम भूगतने पड़ सकते है। हालांकि भाजपा व भाजपा सरकार के अनेक मंत्रियों के बोल मुस्लिम समुदाय के तालूक से अनेक दफा जहरीले आते रहे है। लेकिन जब यही नेता भाजपा से पहले कांग्रेस मे थे तब ओर जब भाजपा छोड़कर कांग्रेस मे शामिल हो जाते है तब शहद की तरह मिठ्ठे बोल बोलने वाले सेकयूलर लीडर की पदवी क्यो पाने लगते है। यानि जब हमारे साथ हो तो पाक दामन और विरोधी दल मे गये तो दामन पर दाग। यह कैसा बर्ताव ?  कांग्रेस व भाजपा की एक तरह से तब एकता साफ साफ नजर आती है। जब जब बनने वाले तीसरे मोर्चे को कमजोर या खत्म करने का अवसर मिलता है। हालांकि तीसरे मोर्चे की बनी सरकारों ने भी मुस्लिम समुदाय के लिये कोई खास सकारात्मक काम नही किये। लेकिन कांग्रेस व भाजपा सरकारों के मुकाबले ठीक सरकारे साबित हुई है।कांग्रेस पार्टी ने मुस्लिम समुदाय मे अपने खास चमचो को पालने व उनको जहनी तौर पर कमजोर करके उनके जेहन मे केवल भाजपा को अबके दफा रोकने का जीमा होने की दी गई घूंटी का गुणगान करवाती रहती है। दो सीट से पूर्ण बहुमत की भाजपा सरकार बनने की असल जिम्मेदार कांग्रेस की नीतियां रही है।
3 2 5 October, 2019
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@kayamkhaniashafaque

भारतीय मुसलमान मसलको मे बंटकर किधर जा रहा है? ।अशफाक कायमखानी।
जयपुर। भारतीय मुसलमान आजादी के बाद से तालिमी, सियासी, महासी व समाजी सहित हर स्तर पर पीछड़ते जाने से सबक लेकर कोई सकारात्मक कदम उठाने की बजाय कुछ कथित धार्मिक ठेकेदारों के झूठे जंजाल मे फंसकर बरबाद होकर तीनके तीनके होने की तरफ बढने लगा है। अल्लाह पाक व कुरान ऐ पाक एक, हदीस शरीफ व रसूल ऐ पाक एक है। तो फिर कुछ कथित धार्मिक ठेकेदार क्यो समुदाय को बांटने पर तूले हुये है।जिसको अल्लाह पाक ने हज बेतुल्ला की जियारत की इजाजत दे रखी है तो उसके मुसलमान होने पर सवाल खड़ा कौन कर सकता है। अपना अकीदा अपने पास। नगलिया अकील गावं मे एक मय्यत के नमाजे जनाजा मे शामिल होने पर कुछ लोगो की धार्मिक ठेकेदार निकाह खारिज करने का ऐहलान करता है। तो दूसरी तरफ राजस्थान के उदयपुर मे एक मसलक के दबंग लोगो द्वारा दूसरे मसलक के मानने वाले शख्स के जनाजे को कब्रिस्तान मे जोरजबरदस्ती दफनाने देने से रोकने के अनेक उदाहरण मोजूद है। जबकि कब्रिस्तान वक्फस जायदाद होती है जिसका मालिक केवल अल्लाह पाक होता है। लेकिन इस तरह के दबंग लोगो को समाज इसलिए उलाहना नही देता क्योंकि उनको कुरान ऐ पाक का ठीक ज्ञान नही होता। अगर उन्हें कुरान ऐ पाक की सही मालूमात होती तो ऐसा हरगिज़ नही होने दैता। उक्त तरह के फतवेबाजी करने वालो से एक सवाल है कि सीकर के बडे कब्रिस्तान मे सालो से लावारिस जनाजो की नमाज ऐ जनाजा होने के साथ उन्हें दफनाया जाता है। जिसमे मुर्दा शख्स का यह भी मालुम नही होता कि वो कहां का व किस मसलक को मानने वाला है। केवल पुलिस से लावारिस बोडी की सुपर्दगी लेकर उपके कफन दफन का काम होता है। पीछले एक अर्शे से भारत मे जगह जगह उक्त तरह के कतिथ धार्मिक ठेकेदार व फतवाबाजो की एक फौज पनप रही है। जिनका मकसद मसलकी विवाद पैदा कर जीतना आपस मे बांटा जा सकता है। उतना बांटकर वो अपना उल्लू सीधा कर रहे है। ऐसे कथित धार्मिक ठेकेदारों का सबसे आसान शिकार कम पढा लिखा व अनपढ सबसे अधिक होते है।जिनके जज्बात को उभार कर उन्हे दूसरे मुस्लिम से लड़ा भीड़ा कर तीन तरह किया जा रहा है।

भारतीय मुसलमान मसलको मे बंटकर किधर जा रहा है? ।अशफाक कायमखानी।
जयपुर।  भारतीय मुसलमान आजादी के बाद से तालिमी, सियासी, महासी व समाजी सहित हर स्तर पर पीछड़ते जाने से सबक लेकर कोई सकारात्मक कदम उठाने की बजाय कुछ कथित धार्मिक ठेकेदारों के झूठे जंजाल मे फंसकर बरबाद होकर तीनके तीनके होने की तरफ बढने लगा है। अल्लाह पाक व कुरान ऐ पाक एक, हदीस शरीफ व रसूल ऐ पाक एक है। तो फिर कुछ कथित धार्मिक ठेकेदार क्यो समुदाय को बांटने पर तूले हुये है।जिसको अल्लाह पाक ने हज बेतुल्ला की जियारत की इजाजत दे रखी है तो उसके मुसलमान होने पर सवाल खड़ा कौन कर सकता है। अपना अकीदा अपने पास।  नगलिया अकील गावं मे एक मय्यत के नमाजे जनाजा मे शामिल होने पर कुछ लोगो की धार्मिक ठेकेदार निकाह खारिज करने का ऐहलान करता है। तो दूसरी तरफ राजस्थान के उदयपुर मे एक मसलक के दबंग लोगो द्वारा दूसरे मसलक के मानने वाले शख्स के जनाजे को कब्रिस्तान मे जोरजबरदस्ती दफनाने देने से रोकने के अनेक उदाहरण मोजूद है। जबकि कब्रिस्तान वक्फस जायदाद होती है जिसका मालिक केवल अल्लाह पाक होता है। लेकिन इस तरह के दबंग लोगो को समाज इसलिए उलाहना नही देता क्योंकि उनको कुरान ऐ पाक का ठीक ज्ञान नही होता। अगर उन्हें कुरान ऐ पाक की सही मालूमात होती तो ऐसा हरगिज़ नही होने दैता। उक्त तरह के फतवेबाजी करने वालो से एक सवाल है कि सीकर के बडे कब्रिस्तान मे सालो से लावारिस जनाजो की नमाज ऐ जनाजा होने के साथ उन्हें दफनाया जाता है। जिसमे मुर्दा शख्स का यह भी मालुम नही होता कि वो कहां का व किस मसलक को मानने वाला है। केवल पुलिस से लावारिस बोडी की सुपर्दगी लेकर उपके कफन दफन का काम होता है। पीछले एक अर्शे से भारत मे जगह जगह उक्त तरह के कतिथ धार्मिक ठेकेदार व फतवाबाजो की एक फौज पनप रही है। जिनका मकसद मसलकी विवाद पैदा कर जीतना आपस मे बांटा जा सकता है। उतना बांटकर वो अपना उल्लू सीधा कर रहे है। ऐसे कथित धार्मिक ठेकेदारों का सबसे आसान शिकार कम पढा लिखा व अनपढ सबसे अधिक होते है।जिनके जज्बात को उभार कर उन्हे दूसरे मुस्लिम से लड़ा भीड़ा कर तीन तरह किया जा रहा है।
4 2 5 October, 2019
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@kayamkhaniashafaque

राजस्थान के खान व जैदी नामक दो मुस्लिम पुलिस अधिकारियों के मिशाली परीवार से कुछ सीखा जा सकता है।
।अशफाक कायमखानी।
जयपुर। हालांकि माना यह जाता है कि पुलिस अधिकारियों की व्यस्ततम नोकरी के चलते अपने बच्चों को जीस समय पिता के साथ की जरुरत अधिक होती है तब उस समय पिता उतना समय उन्हे दे नही पाते है। लेकिन राजस्थान के करीब करीब मुस्लिम पुलिस अधिकारियों के अपनी सरकारी पुलिस सेवा के अलावा पारिवारिक दाहित्व निभाने की आदत की सहरायना करने के साथ साथ उन्हे अपनी पत्नियों के मिले साथ की सभी स्तर पर भूरी भूरी प्रशंसा किये बीना कोई भी नागरिक रह नही सकता।उक्त सीलसीले मे राजस्थान मे तैनात रहे भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी कुवंर सरवर खान व मोजुदा समय मे तैनात हैदर अली जैदी के परिवार पर मामूली फोकस डालना चाह रहा हु। दोनो अधिकारियों मे से कुवर सरवर खान पुलिस सेवा के आईजी पद से सेवानिवृत्त व हैदर अली जैदी मोजुदा समय मे पुलिस अधीक्षक पद पर तैनात है। दोनो अधिकारियों के दो बेटी व एक बेटा है। दोनो ही अधिकारी अपने वालदेन की खिदमत मे मेरे देखने के अनुसार रत्ती भर की कोई खसर नही छोड़ते है। सरवर खान के वालिद का पीछले महिने इंतेकाल हो गया जबकि वालदा अभी हयात है। इसी तरह हैदर अली जैदी के वालिद व वालदा माशाअल्लाह दोनो अल्लाह पाक के फजलो करम से हयात है।दो बेटी व एक एक बेटे के पिता सरवर खान व हैदर अली जैदी के मिशाली व शकून वाले परिवार पर नजर डाले तो पाते है कि माशाअल्लाह इनके परीवार पर अल्लाह पाक का करम है। जदीद तालिम के साथ साथ धार्मिक तालीम के जेवर से सरोबार इन दोनो अधिकारियों के बेटे-बेटियों की तारीफ की जाये वो कम होगी क्योंकि उन बच्चों मे पाक परवरदिगार के फजलो करम से इंसानियत कूट कूट कर भरी होने के कारण वो इंसानी गुण उनके चरित्र पर अवतरित होते हमेशा नजर आते है। सवरर खान का बेटा सरकारी कालेज मे प्रोफेसर है। जबकि दोनो पूत्रीया आला तालीम याफ्ता होने के साथ एक प्रोफेसर व दूसरी अपने घर का काम देखती है। इन तीनो की शादियां हो चुकी है। इसी तरह हैदर अली जैदी की बडी बेटी ने एमबीबीएस करने के बाद पीजी व फिर स्पेलाईजन करने के बाद वो जयपुर मे मशहूर चिकित्सक है। दूसरी बेटी ने केन्द्रीय विश्वविद्यालय से वकालत की डिग्री पाकर मुम्बई मे कार्यरत है। जबकि बेटे ने एमबीबीएस कर लिया है! अतिव्यस्तम मानी जाने वाली पुलिस सेवा मे रहते हुये आवश्यकता अनुसार समय निकाल कर अपने वालदेन के पूरे हक व हकूक अदा करते हुये अपनी शरीके हयात के साथ कंधा से कंधा मिलाकर औलाद की ठकी ठंग से परवरिश करने वाले सेवानिवृत्त पुलिस.....

राजस्थान के खान व जैदी नामक दो मुस्लिम पुलिस अधिकारियों के मिशाली परीवार से कुछ सीखा जा सकता है।
।अशफाक कायमखानी।
जयपुर।  हालांकि माना यह जाता है कि पुलिस अधिकारियों की व्यस्ततम नोकरी के चलते अपने बच्चों को जीस समय पिता के साथ की जरुरत अधिक होती है तब उस समय पिता उतना समय उन्हे दे नही पाते है। लेकिन राजस्थान के करीब करीब मुस्लिम पुलिस अधिकारियों के अपनी सरकारी पुलिस सेवा के अलावा पारिवारिक दाहित्व निभाने की आदत की सहरायना करने के साथ साथ उन्हे अपनी पत्नियों के मिले साथ की सभी स्तर पर भूरी भूरी प्रशंसा किये बीना कोई भी नागरिक रह नही सकता।उक्त सीलसीले मे राजस्थान मे तैनात रहे भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी कुवंर सरवर खान व मोजुदा समय मे तैनात हैदर अली जैदी के परिवार पर मामूली फोकस डालना चाह रहा हु। दोनो अधिकारियों मे से कुवर सरवर खान पुलिस सेवा के आईजी पद से सेवानिवृत्त व हैदर अली जैदी मोजुदा समय मे पुलिस अधीक्षक पद पर तैनात है। दोनो अधिकारियों के दो बेटी व एक बेटा है। दोनो ही अधिकारी अपने वालदेन की खिदमत मे मेरे देखने के अनुसार रत्ती भर की कोई खसर नही छोड़ते है। सरवर खान के वालिद का पीछले महिने इंतेकाल हो गया जबकि वालदा अभी हयात है। इसी तरह हैदर अली जैदी के वालिद व वालदा माशाअल्लाह दोनो अल्लाह पाक के फजलो करम से हयात है।दो बेटी व एक एक बेटे के पिता सरवर खान व हैदर अली जैदी के मिशाली व शकून वाले परिवार पर नजर डाले तो पाते है कि माशाअल्लाह इनके परीवार पर अल्लाह पाक का करम है। जदीद तालिम के साथ साथ धार्मिक तालीम के जेवर से सरोबार इन दोनो अधिकारियों के बेटे-बेटियों की तारीफ की जाये वो कम होगी क्योंकि उन बच्चों मे पाक परवरदिगार के फजलो करम से इंसानियत कूट कूट कर भरी होने के कारण वो इंसानी गुण उनके चरित्र पर अवतरित होते हमेशा नजर आते है। सवरर खान का बेटा सरकारी कालेज मे प्रोफेसर है। जबकि दोनो पूत्रीया आला तालीम याफ्ता होने के साथ एक प्रोफेसर व दूसरी अपने घर का काम देखती है। इन तीनो की शादियां हो चुकी है। इसी तरह हैदर अली जैदी की बडी बेटी ने एमबीबीएस करने के बाद पीजी व फिर स्पेलाईजन करने के बाद वो जयपुर मे मशहूर चिकित्सक है। दूसरी बेटी ने केन्द्रीय विश्वविद्यालय से वकालत की डिग्री पाकर मुम्बई मे कार्यरत है। जबकि बेटे ने एमबीबीएस कर लिया है! अतिव्यस्तम मानी जाने वाली पुलिस सेवा मे रहते हुये आवश्यकता अनुसार समय निकाल कर अपने वालदेन के पूरे हक व हकूक अदा करते हुये अपनी शरीके हयात के साथ कंधा से कंधा मिलाकर औलाद की ठकी ठंग से परवरिश करने वाले सेवानिवृत्त पुलिस.....
8 1 5 October, 2019
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राजस्थान के 253 भारतीय प्रशासनिक अधिकारियों मे 5 मुस्लिम अधिकारी। ।अशफाक कायमखानी। जयपुर। राजस्थान मे भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की तैनाती मे मुस्लिम अधिकारियों की सहभागिता हमेशा से ऊंट के मुहं मे जीरा समान रहती है। जिसमे मे सीधे तौर पर भारतीय सीवील सेवा परीक्षा मे चयनित अधिकारियों की संख्या तो एक हाथ की पांच उगंलियो के समान गिनती करने समान आज तक के इतिहास मे दर्ज है। भारतीय पुलिस सेवा परीक्षा मे चयनीत होकर सीधे तौर पर राजस्थान केडर मे आने वाले आईएएस अधिकारियों मे सबसे पहले 1975-76 मे यूपी के गाजीपुर के रहने वाले सलाऊद्दीन अहमद आये, जो बाद मे राजस्थान के मुख्य सचिव पद से सेवानिवृत्त हुये है। सलाऊद्दीन अहमद साहब के आने के बाद काफी बडा अर्शा गुजर जाने के बाद कशमीर से पहले कमरुल जमा चोधरी व फिर अतर आमीर नामक दो आईएएस अधिकारी आये है। इनके बाद 2018 मे केरल के रहने वाले मुहम्मद जुनैदद पीपी बतौर आईएएस राजस्थान मे आये है। जिनकी अभी मसूरी मे ट्रेनिंग चल रही है। इनके अलावा मोजुदा समय मे राजस्थान प्रशासनिक सेवा व अन्य सेवा से तरक्की पाकर भारतीय प्रशासनिक सेवा केडर मे शामिल हुये उमरदीन खान व जाकीर हुसैन भी राजस्थान मे कार्यरत है। जिनमे से जाकीर हुसैन हनुमानगढ़ के जिला कलेक्टर पद पर पदस्थापित है। रियासतो के विलय के बाद बने राजस्थान प्रदेश मे छ मुस्लिम अधिकारी भी आगे चलकर भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी बनकर अनेक जगह जिला कलेक्टर भी रहे। जिनमे बूंदी रियासत से आये अलाऊद्दीन खिलजी प्रमुख थे। जो अनेक जगह जिला कलेक्टर के पद पर भी पदस्थापित रहे है। रियासतो से आये छ अधिकारियों के अलावा जे.एम खान, ऐ.आर खान, एम. खान, शफी मोहम्मद ,अशफाक हुसैन व मोहम्मद हनीफ खान भी राजस्थान प्रशासनिक व अन्य सेवा से तरक्की पाकर भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी बन चुके है। जिनमे जे.एम खान, ऐ.आर खान, एम.एस खान व अशफाक हुसैन जिला कलेक्टर पद पर भी पदस्थापित रह कर सेवानिवृत्त हो चुके है। इनमे शफी मोहम्मद राजस्थान प्रशासनिक सेवा के अधिकारी रहते प्रतापगढ़ के जिला कलेक्टर रहे है। जबकि उनका भारतीय प्रशासनिक सेवा मे तरक्की बाद मे हुई बताते है। कुल मिलाकर यह है कि राजस्थान के कुछ युवा भारतीय सीवील सेवा परीक्षा पास करके भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी जरुर बने है। लेकिन उन्हे राजस्थान केडर नही मिल पाया। बल्कि पीछले एक दशक मे कमरुल जमा चोधरी, अतर आमीर व मुहम्मद जुनैद पीपी का भारतीय प्रशासनिक सेवा मे चयनित होने के बाद उन्हें राजस्थान के केडर अलाट जरुर हुवा है ।

राजस्थान के 253 भारतीय प्रशासनिक अधिकारियों मे 5 मुस्लिम अधिकारी। ।अशफाक कायमखानी। जयपुर।  राजस्थान मे भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की तैनाती मे मुस्लिम अधिकारियों की सहभागिता हमेशा से ऊंट के मुहं मे जीरा समान रहती है। जिसमे मे सीधे तौर पर भारतीय सीवील सेवा परीक्षा मे चयनित अधिकारियों की संख्या तो एक हाथ की पांच उगंलियो के समान गिनती करने समान आज तक के इतिहास मे दर्ज है। भारतीय पुलिस सेवा परीक्षा मे चयनीत होकर सीधे तौर पर राजस्थान केडर मे आने वाले आईएएस अधिकारियों मे सबसे पहले 1975-76 मे यूपी के गाजीपुर के रहने वाले सलाऊद्दीन अहमद आये, जो बाद मे राजस्थान के मुख्य सचिव पद से सेवानिवृत्त हुये है। सलाऊद्दीन अहमद साहब के आने के बाद काफी बडा अर्शा गुजर जाने के बाद कशमीर से पहले कमरुल जमा चोधरी व फिर अतर आमीर नामक दो आईएएस अधिकारी आये है। इनके बाद 2018 मे केरल के रहने वाले मुहम्मद जुनैदद पीपी बतौर आईएएस राजस्थान मे आये है। जिनकी अभी मसूरी मे ट्रेनिंग चल रही है। इनके अलावा मोजुदा समय मे राजस्थान प्रशासनिक सेवा व अन्य सेवा से तरक्की पाकर भारतीय प्रशासनिक सेवा केडर मे शामिल हुये उमरदीन खान व जाकीर हुसैन भी राजस्थान मे कार्यरत है। जिनमे से जाकीर हुसैन हनुमानगढ़ के जिला कलेक्टर पद पर पदस्थापित है। रियासतो के विलय के बाद बने राजस्थान प्रदेश मे छ मुस्लिम अधिकारी भी आगे चलकर भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी बनकर अनेक जगह जिला कलेक्टर भी रहे। जिनमे बूंदी रियासत से आये अलाऊद्दीन खिलजी प्रमुख थे। जो अनेक जगह जिला कलेक्टर के पद पर भी पदस्थापित रहे है। रियासतो से आये छ अधिकारियों के अलावा जे.एम खान, ऐ.आर खान, एम. खान, शफी मोहम्मद ,अशफाक हुसैन व मोहम्मद हनीफ खान भी राजस्थान प्रशासनिक व अन्य सेवा से तरक्की पाकर भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी बन चुके है। जिनमे जे.एम खान, ऐ.आर खान, एम.एस खान व अशफाक हुसैन जिला कलेक्टर पद पर भी पदस्थापित रह कर सेवानिवृत्त हो चुके है। इनमे शफी मोहम्मद राजस्थान प्रशासनिक सेवा के अधिकारी रहते प्रतापगढ़ के जिला कलेक्टर रहे है। जबकि उनका भारतीय प्रशासनिक सेवा मे तरक्की बाद मे हुई बताते है। कुल मिलाकर यह है कि  राजस्थान के कुछ युवा भारतीय सीवील सेवा परीक्षा पास करके भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी जरुर बने है। लेकिन उन्हे राजस्थान केडर नही मिल पाया। बल्कि पीछले एक दशक मे कमरुल जमा चोधरी, अतर आमीर व मुहम्मद जुनैद पीपी का भारतीय प्रशासनिक सेवा मे चयनित होने के बाद उन्हें राजस्थान के केडर अलाट जरुर हुवा है ।
1 1 5 October, 2019
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@kayamkhaniashafaque

राजस्थान कायमखानी बिरादरी को तालीम व सियासत के पथ पर कदम तेज बढाने होगे। ।अशफाक कायमखानी।
जयपुर।
राजस्थान के अलग अलग क्षेत्र मे देहाती परिवेष मे रहने वाली मुस्लिम समुदाय की कुछ बिरादरियों मे से शेखावाटी-बीकाणा व मारवाड़ के हिस्सों मे खासतौर पर निवास करने वाली कायमखानी बिरादरी को शिक्षा व सियासत मे तेजी से कदम बढाते हुये शासन व प्रशासन मे अपनी भागीदारी सुनिश्चित करनी होगी वरना आने वाले दिन काफी कष्टदायक हो सकते है।
हालांकि आज के समय कुछेक कायमखानी पुलिस व प्रशासनिक सेवा मे बतौर अधिकारी नजर आ रहे है। लेकिन उनकी सेवानिवृत्ति की जो शुरुआत हो चली है वो अब अगले तीन साल मे नजर आ रहे अधिकारी सेवानिवृत्ति के तमगे पा चुके होगे। अगर उनके बदल मे नये अधिकारियों का सीलसीला शुरु नही हो पाया तो यह क्षेत्र भी खाली खाली व सूना सूना नजर आयेगा। हालांकि पीछले कुछ दिनो से युवाओं के दिलो मे फौज मे सिपाही भर्ती होने की ललक बढने के सूखद परिणाम सामने आये है। साथ ही चिकित्सक व इंजीनियर बनने का चलन भी दिल को शकून दे सकता है। पर अफसोस है कि फौज का सिपाही अपनी फौज की सेवा मे खास ओहदे वाईज कोई बडा मुकाम नही पा रहे है। वहीं चिकित्सक व इंजीनियर अपने लाईन का काम तो कर रहे है। लेकिन भारतीय लोकसेवा आयोग द्वारा संचालित सिविल सेवा परीक्षा मे सफल होने वालो मे अधीकांश चिकित्सक व इंजीनियर की सूची मे कोई कायमखानी चिकित्सक व इंजीनियरस युवाओं का नाम शामिल नजर नही आता है। कायमखानी बिरादरी से मरहूम आलम अली खा, मरहूम भालू खा, मरहूम रमजान खां, मरहूम भंवरु खा के अतिरिक्त यूनूस खा व वर्तमान मे हाकम अली खां विधायक है एवं बाकी विधायक रह चुके है। जिनमे से मरहूम रमजान खा राज्य मंत्री व यूनूस खा दो दफा केबिनेट मंत्री भी राजस्थान की सरकार मे रह चुके है। डा.निजाम मोहम्मद, हिदायत खा धोलीया, सलावत खा व लियाकत अली खा राज्य स्तरीय बोर्ड-आयोग के अध्यक्ष भी रह चुके है। सवैधानिक पदो मे जस्टिस भंवरु खा हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधिपति है। वही जस्टिस मोहम्मद रफीक न्यायाधिपति वर्तमान मे है। वही राजस्थान लोकसेवा आयोग के चेयरमैन पद पर हबीब खां गोरान रह चुके है। लेक उक्त सभी बाते इतिहास के पनो मे दर्ज होने के अलावा जाकीर हुसैन के भारतीय प्रशासनिक सेवा व मोहतरमा असलम खान के भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी होने के अतिरिक्त कोई खास उपलब्धि सामने नजर नही आती। इससे अलग हटकर वर्तमान समय मे खानू खान के वक्फ बोर्ड चेयरमैन बनने की उम्मीद के अलावा दो संवेधानिक पदो पर दो अलग से नियुक्ति अन्य दो लोगो को मिलनी की सम्भावना जताई है ।

राजस्थान कायमखानी बिरादरी को तालीम व सियासत के पथ पर कदम तेज बढाने होगे। ।अशफाक कायमखानी।
जयपुर।
 राजस्थान के अलग अलग क्षेत्र मे देहाती परिवेष मे रहने वाली मुस्लिम समुदाय की कुछ बिरादरियों मे से शेखावाटी-बीकाणा व मारवाड़ के हिस्सों मे खासतौर पर निवास करने वाली कायमखानी बिरादरी को शिक्षा व सियासत मे तेजी से कदम बढाते हुये शासन व प्रशासन मे अपनी भागीदारी सुनिश्चित करनी होगी वरना आने वाले दिन काफी कष्टदायक हो सकते है।
हालांकि आज के समय कुछेक कायमखानी पुलिस व प्रशासनिक सेवा मे बतौर अधिकारी नजर आ रहे है। लेकिन उनकी सेवानिवृत्ति की जो शुरुआत हो चली है वो अब अगले तीन साल मे नजर आ रहे अधिकारी सेवानिवृत्ति के तमगे पा चुके होगे। अगर उनके बदल मे नये अधिकारियों का सीलसीला शुरु नही हो पाया तो यह क्षेत्र भी खाली खाली व सूना सूना नजर आयेगा। हालांकि पीछले कुछ दिनो से युवाओं के दिलो मे फौज मे सिपाही भर्ती होने की ललक बढने के सूखद परिणाम सामने आये है। साथ ही चिकित्सक व इंजीनियर बनने का चलन भी दिल को शकून दे सकता है। पर अफसोस है कि फौज का सिपाही अपनी फौज की सेवा मे खास ओहदे वाईज कोई बडा मुकाम नही पा रहे है। वहीं चिकित्सक व इंजीनियर अपने लाईन का काम तो कर रहे है। लेकिन भारतीय लोकसेवा आयोग द्वारा संचालित सिविल सेवा परीक्षा मे सफल होने वालो मे अधीकांश चिकित्सक व इंजीनियर की सूची मे कोई कायमखानी चिकित्सक व इंजीनियरस युवाओं का नाम शामिल नजर नही आता है। कायमखानी बिरादरी से मरहूम आलम अली खा, मरहूम भालू खा, मरहूम रमजान खां, मरहूम भंवरु खा के अतिरिक्त यूनूस खा व वर्तमान मे हाकम अली खां विधायक है एवं बाकी विधायक रह चुके है। जिनमे से मरहूम रमजान खा राज्य मंत्री व यूनूस खा दो दफा केबिनेट मंत्री भी राजस्थान की सरकार मे रह चुके है। डा.निजाम मोहम्मद, हिदायत खा धोलीया, सलावत खा व लियाकत अली खा राज्य स्तरीय बोर्ड-आयोग के अध्यक्ष भी रह चुके है। सवैधानिक पदो मे जस्टिस भंवरु खा हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधिपति है। वही जस्टिस मोहम्मद रफीक न्यायाधिपति वर्तमान मे है। वही राजस्थान लोकसेवा आयोग के चेयरमैन पद पर हबीब खां गोरान रह चुके है। लेक उक्त सभी बाते इतिहास के पनो मे दर्ज होने के अलावा जाकीर हुसैन के भारतीय प्रशासनिक सेवा व मोहतरमा असलम खान के भारतीय पुलिस सेवा  के अधिकारी होने के अतिरिक्त कोई खास उपलब्धि सामने नजर नही आती। इससे अलग हटकर वर्तमान समय मे खानू खान के वक्फ बोर्ड चेयरमैन बनने की उम्मीद के अलावा दो संवेधानिक पदो पर दो अलग से नियुक्ति अन्य दो लोगो को मिलनी की सम्भावना जताई है ।
1 1 5 October, 2019
#kayamkhani 😎😎😎
71 17 4 October, 2019
#kayamkhani 😎😎😎
#happy
70 18 3 October, 2019
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Yaar Beli

दुशमन के जमाई से
ये यार नही मेरे भाई से ❤💓🤩🔥❤ @bhati5317
@bhati_rizwaan_0143
@syedajaz91 .
.
..
#friendshipquotes #bestfriends #yaariyan
#chai  #lover  #desi  #jodhpuri  #jassmanak  #jodhpur #rajasthan  #haryanavi  #haryana  #style  #top  #auto #evening  #morning  #kayamkhani  #nose  #eye  #love  #1  #cool #instagram  #hashtag  #rajasthan  #iphonex  #rajput

दुशमन के जमाई से 
ये यार नही मेरे भाई से ❤💓🤩🔥❤ @bhati5317 
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142 22 3 October, 2019
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💐अल्हम्दुलिल्लाह मर्चेंट नेवी (BSc nautical साइंस) के दानिश कायमखानी सीकर का हुआ सिंगापुर की SYNERGY MARITIME GROUP में प्लेसमेंट 💐♥️♥️ शेखावाटी के जाने माने पत्रकार अशफाक कायमखानी साहब के साहबजादे Danish Kayamkhani Sikar⁩ - दानिश कायमखानी के B.SC ( NAUTICAL) के फाइनल आये रिजल्ट मे 82 प्रतिशत से पास होने के बाद सिंगापुर की SYNERGY MARITIME GROUP, नामी कम्पनी मे अल्लाह पाक के करम से PLACEMENT हो गया है। दानिश के 10th क्लास में 84% और 12th क्लास में 88% (PCM 94%) सीकर से उसके बाद IMU CET टेस्ट में रैंक 1420 थी और ICAR में 259 !
उसके बाद उन्होंने TS Chanakya कॉलेज (नई मुम्बई ) में (2016-19) एडमिशन ले लिया ! दानिश की छोटी बहन जयपुर में डॉक्टर( BUMS) का कोर्स कर रही है और दूसरी छोटी बहन अभी 12th में डॉक्टर के लिए NEET की तैयारी कर रही है और छोटा भाई 11th में IIT JEE फाउंडेशन में है अल्लाह उन तीनों को भी कामयाब करें !! दानिश की माता हाउस वाइफ और पिता अशफाक कायमखानी पत्रकार हैं !! दानिश हमारी टीम एजुकेशन सोसाइटी से भी करीब 1 साल से जुड़े है और मर्चेंट नेवी फील्ड में बच्चों की केरियर गाइडेंस में मदद करते हैं अगर आप भी कोई कैरियर संबंधी सवाल पूछना चाहे तो बेझिझक दानिश से फोन (+91 9413987052) पर कॉल कर सकते हैं ! हमारी टीम दानिश के उज्जवल भविष्य की कामना करती है शुक्रिया!!

💐अल्हम्दुलिल्लाह मर्चेंट नेवी (BSc nautical साइंस) के दानिश कायमखानी सीकर का हुआ सिंगापुर की SYNERGY MARITIME GROUP में प्लेसमेंट 💐♥️♥️ शेखावाटी के जाने माने पत्रकार अशफाक कायमखानी साहब के साहबजादे Danish Kayamkhani Sikar⁩ - दानिश कायमखानी के B.SC ( NAUTICAL) के  फाइनल आये रिजल्ट मे 82 प्रतिशत से पास होने के बाद सिंगापुर की SYNERGY MARITIME GROUP,  नामी कम्पनी मे अल्लाह पाक के करम से PLACEMENT हो गया है। दानिश के 10th क्लास में 84% और 12th क्लास में 88% (PCM 94%) सीकर से उसके बाद IMU CET टेस्ट में रैंक 1420 थी और ICAR में 259 ! 
उसके बाद उन्होंने TS Chanakya कॉलेज (नई मुम्बई ) में (2016-19) एडमिशन ले लिया !  दानिश  की छोटी बहन जयपुर में डॉक्टर( BUMS)  का कोर्स कर रही है और दूसरी छोटी बहन अभी 12th में डॉक्टर के लिए NEET की तैयारी कर रही है और छोटा भाई 11th में IIT JEE फाउंडेशन में है अल्लाह उन तीनों को भी कामयाब करें !! दानिश की माता हाउस वाइफ और पिता अशफाक कायमखानी पत्रकार हैं !! दानिश हमारी टीम एजुकेशन सोसाइटी से भी करीब 1 साल से जुड़े है और मर्चेंट नेवी फील्ड में बच्चों की केरियर गाइडेंस में मदद करते हैं अगर आप भी  कोई कैरियर संबंधी सवाल पूछना चाहे तो बेझिझक दानिश से फोन (+91 9413987052) पर कॉल कर सकते हैं ! हमारी टीम दानिश के उज्जवल भविष्य की कामना करती है शुक्रिया!!
27 3 3 October, 2019
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Aapke Dilon Me

Uncle... Gazi Khan 😍 Leader of सर्व समाज फतेहपुर

Blessed to have a uncle like him ..😍 #gazikhan . #kayamkhani

Uncle... Gazi Khan 😍  Leader of  सर्व समाज फतेहपुर

Blessed to have a uncle like him ..😍 #gazikhan . #kayamkhani
19 0 1 October, 2019

Top #kayamkhani posts

153 5 2 October, 2019
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Shekhawati Sr. Sec. School, Losal, Sikar (Raj.)

राजस्थान की शान #मुस्कान_खान_कायमखानी शेखावाटी स्कूल लोसल सीकर ने विज्ञान वर्ग में 97.20% बना कर राजस्थान टॉप किया ।
हम बहन के उज्ज्वल भविष्य की दुआ करते है
#Congratulations_Sister
pride Sister of Rajasthan #MUSKAN_KHAN_KAYAMKHANI Shekhawati School, Losal Sikar topped Rajasthan by making 97.20% in science class.
We pray for a bright future of sister
#congratulations_sister
#Congratulations_Sister
#rajasthani #follow4follow #followme #followtrain #follo #insta #instagood #instagay #like4like #proud_of_kayamkhani
#kayamkhani #👍👍👍

राजस्थान की शान #मुस्कान_खान_कायमखानी शेखावाटी स्कूल लोसल सीकर ने विज्ञान वर्ग में 97.20% बना कर राजस्थान टॉप किया ।
हम बहन के उज्ज्वल भविष्य की दुआ करते है 
#Congratulations_Sister
pride Sister of Rajasthan #MUSKAN_KHAN_KAYAMKHANI Shekhawati School, Losal Sikar topped Rajasthan by making 97.20% in science class.
We pray for a bright future of sister
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#rajasthani #follow4follow #followme #followtrain #follo #insta #instagood #instagay  #like4like #proud_of_kayamkhani
#kayamkhani #👍👍👍
274 30 24 May, 2018